बहुत याद आते हो
अक्सर, बहुत याद आते हो तुम!
समंदर-से इस सीने में
क्यूँ खलबली मचाते हो तुम?
कुछ वक़्त का ही तो सफर था तुम्हारा ज़िन्दगी में मेरी
फिर क्यूँ मुझको खुद से भी ज्यादा याद रहते हो तुम?
बहुत याद आते हो
अक्सर, बहुत याद आते हो तुम!
स्मृति ठाकुर