रास्तों से कुछ यूं उलझ सी गई है जिंदगी
के हर सफर अब ना खत्म होता राब्ता सा लगे!
जो पहुंचा है मंजिलों तक
अब उनकी दास्तां ही काफी है
कौन कहता है यह जिंदगी सिर्फ उम्मीद पर ही बाकी है?
बहुत मशहूर है कुछ किस्से ऐसे
सांस लेती जिनसे, खामोशिया हैं