चलो यादों की गलियों में अतीत को फिर से बनाते हैं
बिखरी उन कहानियों को नए अंदाज़ सिखाते हैं !
बहुत खूबसूरत हैं वो
ये एहसास उनको फिर से कराते हैं
भीगे कुछ पन्हो को धूप में सुखाते हैं !
जिंदगी की ओर फिर एक बार मुस्कुराते हैं
यादों को जीने का, एक ढंग बनाते हैं,
चलो यादों की गलियों में अतीत को फिर से बनाते हैं!
स्मृति ठाकुर

