Thursday, 30 December 2021

 

चलो यादों की गलियों में अतीत को फिर से बनाते हैं

बिखरी उन कहानियों को नए अंदाज़ सिखाते हैं !

बहुत खूबसूरत हैं वो

ये एहसास उनको फिर से कराते हैं

भीगे कुछ पन्हो को धूप में सुखाते  हैं !

जिंदगी की ओर फिर एक बार मुस्कुराते हैं

यादों को जीने का, एक ढंग बनाते हैं,

चलो यादों की गलियों में अतीत को फिर से बनाते हैं!

                                                                                   स्मृति ठाकुर