Thursday, 20 October 2022

 रास्तों से कुछ यूं उलझ सी गई है जिंदगी

 के हर सफर अब ना खत्म होता राब्ता सा लगे!


जो पहुंचा है मंजिलों तक 

अब उनकी दास्तां ही काफी है

कौन कहता है यह जिंदगी सिर्फ उम्मीद पर ही बाकी है?

बहुत मशहूर है कुछ किस्से ऐसे 

सांस लेती जिनसे, खामोशिया हैं 

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