Thursday, 10 June 2021

 



तेरी चाहत को मैं


कलम पे तो उतार लूं


तू मिल जाएं तो


पूरी काएनात को तराश दूँ!


पूरा हो जहान में  ऐसा ख़्वाब हैं कहाँ ?


जरा रुक कर  में उसकी सूरत तो निहार लूँ


तेरी इश्क़ की उस दास्तान को


चलो आज मैं एक नाम दूँ !

                                                (स्मृति ठाकुर)

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