* इस आसमान को तेरी ही जमीन की ख्वाहिश थी
बरसने के लिए!
* तुम दिल में हो
धड़कन में नहीं!
ये किस्सा तो बहुत आम हैं जनाब
आँखों पर पड़े पर्दे को जरा
हल्के से तो उठाईये !
* आँखे इतनी खाली हो गई हैं की
के अब कोई सपना भी
किराये पर नहीं मिलता! (स्मृति ठाकुर)
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