Friday, 11 June 2021

 



* इस आसमान को तेरी ही जमीन की ख्वाहिश थी

 बरसने के लिए!


* तुम दिल में हो 

 धड़कन में नहीं!

 ये किस्सा तो बहुत आम हैं जनाब 

आँखों पर पड़े पर्दे को जरा  

हल्के से तो उठाईये !


* आँखे इतनी खाली हो गई हैं की 

    के अब कोई सपना भी 

   किराये पर नहीं मिलता!                                         (स्मृति ठाकुर) 

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