Ankahi
Wednesday, 7 March 2018
चोला इश्क का रंगा था, इश्क़ में
ओर रंग हवा में ढूंढ रहे थे !
तेरे काफिले पे आके
जाने क्यूँ तुझको ढूंढ रहे थे ?
वो खुदा भी तो रंगा था तेरे इश्क़ में
जाने फिर क्यूँ इश्क़ लोग
इश्क़ में ढूंढ रहे थे !
स्मृति
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