बहुत कोशिश करते है मिटाने की
के तुम फिर अक्षरों में उतर आते हो
जाने क्या बात है तुम में
के बिना तस्वीर के भी
साफ़ नज़र आते हो !
कल्पना हो मेरी
या हो कोई हकीकत
जाने क्यूँ हर बार इतना
उलझा जाते हो
स्मृति
उलझा जाते हो
No comments:
Post a Comment