Ankahi
Saturday, 3 March 2018
. . .
हर शाम को सुबह का इंतज़ार हो
ये जरुरी तो नहीं
हर ज़र्रे में तेरा एहसास हो
ये जरुरी तो नहीं
वो वक़्त भी अजीब होगा
जब तू सामने होगा
पर मेरा नहीं
स्मृति
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