साथ आज भी हैं...
कुछ टूटा था उस दिन
के गूँज उसकी कानो में आज भी है
हर ज़र्रे को मानो
तेरी तलाश आज भी है!
छुप कर देखता है आज भी वो कोना
क्या वो झलक आज भी है
बन्द दरवाजो में रोशनी तेरी
चमकती आज भी है!
एक अजीब सा सिलसिला था वो भी
बात तो कोई थी नहीं
पर बातें याद आज भी है
तेरी हलकी हलकी सी वो हंसी
मेरे लबों पर सजी सी है!
इक अजीब सा सकूँ था उस वक़्त में
जिसका हाथ थामे चलते हम आज भी है
कुछ देर के लिए ही सही स्मृति
तेरा वो वक़्त मेरा आज भी है !
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